रायगढ़ निवासी भोजराम पटेल के IPS बनने की कहानी संघर्ष की

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Real Motivational Story_By_CGJobs24.com

भोजराम पटेल  नक्सल प्रभावित कांकेर के नये SP की कमान संभालने जा रहे हैं। राज्य सरकार ने बतौर पुलिस अधीक्षक उन्हें पहली पोस्टिंग दी है। राज्यपाल के एडीसी से कांकेर से पुलिस कप्तान बनने जा रहे भोजराम के IPS बनने की कहानी संघर्ष की बड़ी मिसाल है। बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले भोजराम पटेल 2013 बैच के IPS अफसर हैं।

*रायगढ़ के तारापुर गांव के रहने वाले भोजराम पटेल* का बचपन संघर्षों में गुजरा। माता निरक्षर और पिता प्राइमरी पास और घर चलाने के लिए दो बीघा पुश्तैनी जमीन के अलावा कुछ और नहीं था। सरकारी स्कूल में पढ़े भोजराम ने बचपन के दिनों में खेतों में काम किया, तो पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश शुरू की। इसी दौरान उन्होंने शिक्षाकर्मी भर्ती परीक्षा पास की और वर्ग-2 शिक्षाकर्मी में उनका चयन हुआ। शिक्षाकर्मी बनने के बाद उन्होंने नौकरी शुरू की, लेकिन आंखों में ख्वाब तो UPSC का पल रहा था। लिहाजा शिक्षाकर्मी रहते-रहते ही भोजराम ने अपनी तैयारी शुरू कर दी।

कई रात आधे पेट खाकर सोने वाले भोजराम ने कठिन परिश्रम कर आखिरकार यूपीएससी की परीक्षा पास की। हालांकि उनका सपना आईएएस बनने का था, लेकिन रैंक मन माफिक नहीं मिला, जिसकी वजह से उन्हें IPS से ही संतोष करना पड़ा। साल 2007-08 से जुटे भोजराज ने अपनी तैयारी शिक्षाकर्मी की नौकरी पर रहते हुए पूरी की। यहां तक कि वे नियमित रूप से दिल्ली में भी नहीं रहे। उनके कुछ दोस्त दिल्ली में रहते हैं, उन्होंने तैयारी में मदद की। भोजराम पटेल को UPSC में 323वीं रैंक मिली थी।

गरीबी को बेहद करीब से देखने वाले भोजराम को आज भी जब मौका मिलता है, वो अपने उस गांव के स्कूल में जरूर जाते हैं, जहां उन्होंने बचपन के वक्त गुजारे थे। वहां वो बच्चों को पढ़ाते हैं और आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।

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